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Hymn No. 2722 | Date: 20-Sep-19981998-09-20कर तू अपनेआप का इलाज, के औरों पर अपेक्षा रखकर तू क्यों बैठा हैhttps://www.mydivinelove.org/bhajan/?title=kara-tu-apaneapa-ka-ilaja-ke-aurom-para-apeksha-rakhakara-tu-kyom-baithaकर तू अपनेआप का इलाज, के औरों पर अपेक्षा रखकर तू क्यों बैठा है,
खुदाई की राह पर चलना है पर खुदा को पाना ना इतना आसान है ।
खेल नही ये सौदेबाजी का, यहाँ तो दाँव पर सर अपना हमें रखना है,
अपनी इच्छाओं के कवच-कुंडल को हमें अपनेआप से जुदा करना है ।
ना हालात की कोई परवाह, ना समझौता हमें कोई करना है,
अपनेआप को जगाना है खुद ही, के खुद को खुदा बनाना है ।
अहंकार की बात नही है ये, पर अपनेआप में वीरत्व जगाना है,
नही करनी है हमें परवाह कोई जख्मों की, के हमें आगे ही आगे बढ़ते जाना है ।
कोई और कुछ कर नही सकता जहाँ कुछ भी, वहाँ सारे खयाल मिटाना है ,
खुदा को पाना नही है इतना आसान, के दिल की गहराई में हमें डूब जाना है ।
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कर तू अपनेआप का इलाज, के औरों पर अपेक्षा रखकर तू क्यों बैठा है
कर तू अपनेआप का इलाज, के औरों पर अपेक्षा रखकर तू क्यों बैठा है,
खुदाई की राह पर चलना है पर खुदा को पाना ना इतना आसान है ।
खेल नही ये सौदेबाजी का, यहाँ तो दाँव पर सर अपना हमें रखना है,
अपनी इच्छाओं के कवच-कुंडल को हमें अपनेआप से जुदा करना है ।
ना हालात की कोई परवाह, ना समझौता हमें कोई करना है,
अपनेआप को जगाना है खुद ही, के खुद को खुदा बनाना है ।
अहंकार की बात नही है ये, पर अपनेआप में वीरत्व जगाना है,
नही करनी है हमें परवाह कोई जख्मों की, के हमें आगे ही आगे बढ़ते जाना है ।
कोई और कुछ कर नही सकता जहाँ कुछ भी, वहाँ सारे खयाल मिटाना है ,
खुदा को पाना नही है इतना आसान, के दिल की गहराई में हमें डूब जाना है ।