View Hymn (Bhajan)
Sr No. 1193 | Date: 20-Feb-19951995-02-201995-02-20चाहते हैं फूल चूनना, काँटे ही चून लेते हैंSant Sri Apla Mahttps://www.mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=chahate-hai-phula-chunana-kante-hi-chuna-lete-haiचाहते हैं फूल चूनना, काँटे ही चून लेते हैं
कभी जानकर तो कभी अनजाने में, हरकत यही दोहराते रहते हैं
किसी और से नहीं, अक्सर दर्द से ही मिलते रहते हैं
गली के हर मोड़ पर, मुलाकात अपनी, दर्द से होती रहती है
अपना मेल-जोल कुछ इस तरह बढ़ा देते हैं, कि दर्द में ही डूबे रहते हैं
उसमें से बहार निकलने की कोशिश तक करना हम छोड़ देते हैं
कभी दर्द के डर से, तो कभी निराश होकर, वहीं पड़े रहते हैं
कदम अपने ना आगे ना पीछे हम बढ़ाते हैं
कभी अनजाने से, तो कभी पुराने से, पर दर्द से ही मिलते हैं
पता नहीं चला उसका अब तक, कि हम उसके घर जाते हैं कि वह आता है
चाहते हैं फूल चूनना, काँटे ही चून लेते हैं