View Hymn (Bhajan)
Sr No. 3870 | Date: 12-Jun-20002000-06-122000-06-12समझ भरा समझौता रहता है हमेशा आबाद, नासमझी भरा समझौता ज्यादा टीक नहीं पाता है ।Sant Sri Apla Mahttps://www.mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=samaja-bhara-samajauta-rahata-hai-hamesha-abada-nasamaji-bhara-samajautaसमझ भरा समझौता रहता है हमेशा आबाद, नासमझी भरा समझौता ज्यादा टीक नहीं पाता है ।
हकीकत से करके पहचान जो रहता है, वो हर कदम पर न बेहाल होता है ।
खयालों की ऊँचाई पर उड़नेवाले अक्सर चोट गहरी खाते हैं ।
समझदारी से पायें सबकुछ हम, समझदारी ही हमें चैन देती है,
सच्ची समझ आ जाये तो, हमारे दिल के दरबार में रूक जाये तो ।
खुदा की खुदाई की पहचान मिल जाती है, सच्ची समझ सबकुछ सम कर देती है ।
समझे क्या न समझे, हरदम जो ये दुविधा में पलते हैं ।
ना वो कभी अपने मुकाम हासिल करने में कामयाब रहते हैं ।
समझें जो समझ को, ना उनके दर पर दुःख दर्द ज्यादा टिक पाते हैं ।
समा ले जो अपनी समझ में खुदा को वो तो समझ से ही परे हो जाता है ।
इस मंजर तक पहुँचने के लिये सच्ची समझ को अपनाना हमें होता है ।
समझ भरा समझौता रहता है हमेशा आबाद, नासमझी भरा समझौता ज्यादा टीक नहीं पाता है ।