Share ✕ आती है बात जब बलिदान की सुनी अनसुनी करके, नादान हम बन जाते हैं नादानियत की ओढ़ के चादर, हम सो जाते हैं- संत श्री अल्पा माँ आती है बात जब बलिदान की सुनी अनसुनी करके, नादान हम बन जाते हैं नादानियत की ओढ़ के चादर, हम सो जाते हैं - संत श्री अल्पा माँ Previous आती है जब समझ, समझ को समझ ने की, देर बहुत तब हो जाती है Next आने वाले हर पल से अनजान हैं यारों Video