मानती थी जब मैं अपने दिल को अपना
तब कहा होता कि ना आना पास मेरे
शायद मैं रुक जाती
पर अब रुकना नामुमकिन है
- संत श्री अल्पा माँ
मानती थी जब मैं अपने दिल को अपना
तब कहा होता कि ना आना पास मेरे
शायद मैं रुक जाती
पर अब रुकना नामुमकिन है
- संत श्री अल्पा माँ