View Hymn (Bhajan)

Sr No. 1357 | Date: 09-Sep-19951995-09-09सागर से अगर पूछे कोई, कि बता, तेरी है कितनी गहराईhttps://www.mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=sagara-se-agara-puchhe-koi-ki-bata-teri-hai-kitani-gaharaiसागर से अगर पूछे कोई, कि बता, तेरी है कितनी गहराई

सुनकर नादनीयत भरा सवाल, वह मन ही मन मुस्कुराता है

पर वह कुछ नहीं कहता है, वह खामोश ही रहता है

पूछे कोई पर्वत से जाकर, कि बता, है तेरी कितनी उँचाई

पूछे अगर कोई प्यार में डूबे दिल से, कि बता, तेरे दिल में है प्यार कितना

पूछो चाहे लाख सवाल, कुछ सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं

बयाने जिक्र से हर बात समझी-समझायी नहीं जाती है

फिर भी नादानों की नादानीयत में कोई कमी ना आती है

भूलकर मंजिल को अपनी, औरों की राह में टांग अड़ाते हैं

अक्लमंद की साबीती में, बेवकूफों का करार मिलता है

फिर भी वह नहीं समझते हैं, बस सवाल पर सवाल किए जाते हैं

सागर से अगर पूछे कोई, कि बता, तेरी है कितनी गहराई
Sagara se agara puchhe koi, ki bata, teri hai kitani gaharai

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सागर से अगर पूछे कोई, कि बता, तेरी है कितनी गहराई

सुनकर नादनीयत भरा सवाल, वह मन ही मन मुस्कुराता है

पर वह कुछ नहीं कहता है, वह खामोश ही रहता है

पूछे कोई पर्वत से जाकर, कि बता, है तेरी कितनी उँचाई

पूछे अगर कोई प्यार में डूबे दिल से, कि बता, तेरे दिल में है प्यार कितना

पूछो चाहे लाख सवाल, कुछ सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं

बयाने जिक्र से हर बात समझी-समझायी नहीं जाती है

फिर भी नादानों की नादानीयत में कोई कमी ना आती है

भूलकर मंजिल को अपनी, औरों की राह में टांग अड़ाते हैं

अक्लमंद की साबीती में, बेवकूफों का करार मिलता है

फिर भी वह नहीं समझते हैं, बस सवाल पर सवाल किए जाते हैं



- संत श्री अल्पा माँ
Lyrics in English


sāgara sē agara pūchē kōī, ki batā, tērī hai kitanī gaharāī

sunakara nādanīyata bharā savāla, vaha mana hī mana muskurātā hai

para vaha kucha nahīṁ kahatā hai, vaha khāmōśa hī rahatā hai

pūchē kōī parvata sē jākara, ki batā, hai tērī kitanī um̐cāī

pūchē agara kōī pyāra mēṁ ḍūbē dila sē, ki batā, tērē dila mēṁ hai pyāra kitanā

pūchō cāhē lākha savāla, kucha savālōṁ kē javāba nahīṁ milatē haiṁ

bayānē jikra sē hara bāta samajhī-samajhāyī nahīṁ jātī hai

phira bhī nādānōṁ kī nādānīyata mēṁ kōī kamī nā ātī hai

bhūlakara maṁjila kō apanī, aurōṁ kī rāha mēṁ ṭāṁga aḍa़ātē haiṁ

aklamaṁda kī sābītī mēṁ, bēvakūphōṁ kā karāra milatā hai

phira bhī vaha nahīṁ samajhatē haiṁ, basa savāla para savāla kiē jātē haiṁ