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इच्छाओं में हम भटकते बार बार हम अटकते,
न होने पर पूरी इच्छा सिर अपना हम पटकते।
नयन भटकते हाथ फटकते नृत्य तो खूब हम करते,
पाने आए थे मंजिल आखिर जीवन व्यर्थ ही गँवाते।

- संत श्री अल्पा माँ
इच्छाओं में हम भटकते बार बार हम अटकते,
न होने पर पूरी इच्छा सिर अपना हम पटकते।
नयन भटकते हाथ फटकते नृत्य तो खूब हम करते,
पाने आए थे मंजिल आखिर जीवन व्यर्थ ही गँवाते।



- संत श्री अल्पा माँ

 
इच्छाओं में हम भटकते बार बार हम अटकते,
न होने पर पूरी इच्छा सिर अपना हम पटकते।
नयन भटकते हाथ फटकते नृत्य तो खूब हम करते,
पाने आए थे मंजिल आखिर जीवन व्यर्थ ही गँवाते।
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