Share ✕ मंजिल की तलाश में हम फिर रहे थे मंजिल की तो बहुत पास हम खड़े थे फिर भी हम उसे ना पहचान रहे थे- संत श्री अल्पा माँ मंजिल की तलाश में हम फिर रहे थे मंजिल की तो बहुत पास हम खड़े थे फिर भी हम उसे ना पहचान रहे थे - संत श्री अल्पा माँ Previous मुकाबला करने की इच्छा कम हो जाती है Next मैंने ना दिया मौका जमाने को अपने आपको जानने का Video