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नज़र अंदाज करना है जिसे, उसे गैर समझते हैं
अपने किए करतूत पर खुद ही शरमाते हैं

- संत श्री अल्पा माँ
नज़र अंदाज करना है जिसे, उसे गैर समझते हैं
अपने किए करतूत पर खुद ही शरमाते हैं



- संत श्री अल्पा माँ

 
नज़र अंदाज करना है जिसे, उसे गैर समझते हैं
अपने किए करतूत पर खुद ही शरमाते हैं
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