Share ✕ नज़र अंदाज करना है जिसे, उसे गैर समझते हैं अपने किए करतूत पर खुद ही शरमाते हैं- संत श्री अल्पा माँ नज़र अंदाज करना है जिसे, उसे गैर समझते हैं अपने किए करतूत पर खुद ही शरमाते हैं - संत श्री अल्पा माँ Previous न है जिसका जवाब, एक ऐसा सवाल है तू Next नज़र के झरोखों से, आपको दिल के महल में बिठाया था Video