View Hymn (Bhajan)
Sr No. 488 | Date: 07-Nov-19931993-11-071993-11-07चुन-चुन उठाए तू पाप की लाठी, काहे गठरी बाँधे रेSant Sri Apla Mahttps://www.mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=chunachuna-uthae-tu-papa-ki-lathi-kahe-gathari-bandhe-reचुन-चुन उठाए तू पाप की लाठी, काहे गठरी बाँधे रे
हो जाएगी भारी तेरी गठरी, ना उठेगी वह तुझसे रे
नहीं सह पाएगा भार उसका, फिर क्यों तू ना माने रे
ना सुने तू किसी की, क्यों पाप की लाठी चुने रे
नहीं है गुन्हा तेरा कोई, क्यों खुद पर जुल्म ढाए रे
अपने ही हाथों, क्यों तू अपनी हस्ती मिटाए रे
कर कम अपनी गठरी को तू, करके कुछ शुभ काम रे
प्रभु के चरणों में कर दे अपना जीवन अर्पण रे
दिया हुआ है जीवन उसका, सबकुछ कर दे उसके नाम रे
छोड़ दे सबकुछ करना, कर ले बस यही नेक काम रे
खोल दे गठरी तेरी उसके सामने, करके प्रायश्चित ले ले उसी का नाम रे
बच जाएगा आँधी-तूफान से, कर ले स्वीकार शांति का धाम रे
चुन-चुन उठाए तू पाप की लाठी, काहे गठरी बाँधे रे