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Hymn No. 2145 | Date: 31-May-19971997-05-31लगाए यह तो कैसे लगाए, के मन हमारा प्रभु तुझमें लगता नहीhttps://www.mydivinelove.org/bhajan/?title=lagae-yaha-to-kaise-lagae-ke-mana-hamara-prabhu-tujamem-lagata-nahiलगाए यह तो कैसे लगाए, के मन हमारा प्रभु तुझमें लगता नही,
पाना चाहते है चैन मगर बेचैनी से पीछा हमारा छूटता नहीं।
रोके तो कैसे रोके हमारे मन की उड़ान को, के यह रोके हमारे रूकता नही,
पहुँच जाता है उन्ही मंजरों के पास, जो बेचैनी के इलावा कुछ और देखती नही,
कभी इधर तो कभी उधर एक ठिकाने पर यह रूक सकता नही।
विश्वास का साथ चाहे, पर शंका जगाए बिना यह रहता नही।
नहीं जानता है यह कुछ ज्यादा फिर भी अहंकार कम होता नही।
तेरी चाल को समझने चला है, पर अपनी चाल सुधारता नहीं।
अब और क्या कह हम, कि हमें भ्रम और माया के सिवाय कुछ और देता नही।
पाना चाहते है हम शांति पर तुझ तक यह पहुँचने हमें देता नही
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लगाए यह तो कैसे लगाए, के मन हमारा प्रभु तुझमें लगता नही
लगाए यह तो कैसे लगाए, के मन हमारा प्रभु तुझमें लगता नही,
पाना चाहते है चैन मगर बेचैनी से पीछा हमारा छूटता नहीं।
रोके तो कैसे रोके हमारे मन की उड़ान को, के यह रोके हमारे रूकता नही,
पहुँच जाता है उन्ही मंजरों के पास, जो बेचैनी के इलावा कुछ और देखती नही,
कभी इधर तो कभी उधर एक ठिकाने पर यह रूक सकता नही।
विश्वास का साथ चाहे, पर शंका जगाए बिना यह रहता नही।
नहीं जानता है यह कुछ ज्यादा फिर भी अहंकार कम होता नही।
तेरी चाल को समझने चला है, पर अपनी चाल सुधारता नहीं।
अब और क्या कह हम, कि हमें भ्रम और माया के सिवाय कुछ और देता नही।
पाना चाहते है हम शांति पर तुझ तक यह पहुँचने हमें देता नही