View Hymn (Bhajan)
Sr No. 3854 | Date: 20-Apr-20002000-04-202000-04-20तनहा रह पाते नहीं, महफिल रास आती नहींSant Sri Apla Mahttps://www.mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=tanaha-raha-pate-nahim-mahaphila-rasa-ati-nahimतनहा रह पाते नहीं, महफिल रास आती नहीं,
ऐ ज़िंदगी ये कैसी बेबसी, जो समझ में आती नहीं ।
समझना चाहें बहुत कुछ, पर समझने की तैयारी नहीं ।
अपनायें कैसे नई रीत, जहाँ रीत पुरानी छुटती नहीं ।
कभी आँसू कभी हँसी, कि मस्ती में आँख डूबती नहीं ।
बेरुखी हमारी हमसे नाता तोड़ती नहीं ।
बेचैनी, बेवफाई हमसे करती नहीं ।
सुकून ढूँढ़ रहे हैं हम, पर कोई भी सय हमें सुकून दे पाती नहीं ।
कि बिगडी दास्ताँ हमारी, सँवरने का नाम लेती नहीं ।
हमारी ही हालत हमपर तरस खाती नहीं ।
तनहा रह पाते नहीं, महफिल रास आती नहीं